सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आज का प्रेरक विचार✍🏻🙏🏻

आज का प्रेरक विचार✍🏻🙏🏻

खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है। 
हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है,  उसका आनंद लीजिये🙏 बाल रंगने है तो रंगिये,  वज़न कम रखना है तो रखिये, 
मनचाहे कपड़े पहनने है तो पहने, बच्चों की तरह खिलखिलाइये, 
अच्छा सोचिये, अच्छा माहौल रखिये, 
शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये। 

कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती, 
कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,
कोई तेल बाल नही उगाता, 
कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता। 
चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि .....सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। किसी का झूठ आटे में नमक जैसा है तो किसी का उलट।

ये सब कुदरती होता है। 
उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है। 
पुरानी मशीन को Maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नही कर सकते।

ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम। 
किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती ! 

कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,
कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,
कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं 
या आपके होंठों की shape perfect नही हैं....

फिर भी हम सुंदर हैं, 
अपनी सुंदरता को पहचानिए।

दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना।

हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं 
...और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।

मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।

पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही।
आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।

सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,
यह खाओ, वो मत खाओ, ठंडा खाओ, गर्म पीओ, 
दाहिने से सोइये , बांए से उठिए, हरी सब्जी खाओ, 
दाल में प्रोटीन है,

अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा 
ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !!
आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे। क्योकि आप नही जान पाएंगे, की यह उपदेश देने वाला कितना अनुभवी है। 

ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है। 
स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है। इस्तेमाल करे परन्तु विवेक के साथ।

अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं,
कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ।

हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, 
हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। मन भर खाइये न कि पेट भर।

*भोजन का संबंध मन से होता है* 
*और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है।*
*मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता।*
थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,
टहलने जाइये, लाइट कसरत करिये, व्यस्त रहिये,  खुश रहिये,
शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये


🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸
आप सभी का दिन शुभ रहे। 🙏🏻🙏🏻

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*  *औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।* *महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।* *सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।* *बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।* *जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।* *चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५*  मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।  इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।  शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है। १ प्रथम शैलपुत्री यानि ...

बुज़ुर्गों का सम्मान करें यह हमारी धरोहर है ...

पिता जिद कर रहे थे कि उसकी चारपाई गैलरी में डाल दी जाये। बेटा परेशान था। बहू बड़बड़ा रही थी..... कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता। हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं गैलरी से सबका निकलना आना जाना है पता नही वहां क्यो पड़े रहना चाहते हैं? पिता कमजोर और बीमार हैं चारपाई से उठ भी नही पाते.... जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ। अमित ने सोचा। पिता की इच्छा  पू्री करना उसका स्वभाव था। अब पिता की चारपाई गैलरी में आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते । कुछ देर लान में टहलते । लान में खेलते नाती - पोतों से बातें करते , हंसते , बोलते और मुस्कुराते । कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें लाने की फरमाईश भी करते । खुद खाते , बहू - बटे और बच्चों को भी खिलाते .... धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था। दादा !  मेरी बाल फेंको... गेट में प्रवेश करते हुए अमित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी, तो अमित अपने बेटे को डांटने लगा... अंशुल बाबा बुजुर...

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द एक अध्ययन के मुताबिक 1999-2010 के बीच मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ी बीमारियों में 45 फीसदी का इजाफा हुआ है। शोध बताते हैं कि भविष्य में मानसिक रोगों के बाद मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द की बीमारी दूसरी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या होगी।  समय पर सही जांच व उपचार के बारे में बता रही हैं एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ रूमैटॉलजी में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमा कुमार देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां मधुमेह, रक्तचाप, दिल के रोग आदि बढ़ रहे हैं, लेकिन एक और बीमारी है, जो तेजी से अपने पैर पसार रही है। खेद की बात यह है कि इसकी ओर नीति-निर्माताओं का ध्यान भी कम है। यह रोग है मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ा गठिया या आर्थ्राइटिस। इसमें मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, सूजन, लालिमा पैदा होती है। इसके रोगी को उठने-बैठने, चलने-फिरने, झुकने या किसी खास किस्म का कार्य करने में तकलीफ होती है। इसे रूमैटिज्म या गठिया कहते हैं। गठिया की बीमारी करीब दो सौ किस्म की होती है। कई बार कई किस्म के बुखार या कभी-कभी मांसपेशियों के दबने या उन पर दबाव पड़ने की वजह ...