लालदासी सम्प्रदाय में देवी - पूजा निषेध क्यों ? माता वैष्णव मन्दिर जम्मू में तीन पिन्डीयों की पूजा की जाती है, जिनमें एक कालीमाता, मध्य में महालक्ष्मी व तीसरी सरस्वती माता। इन तीनों शक्तियों को वैष्णव माता के नाम से जाना जाता है । देवी शक्ति को मानव का आदि सनातन रूप माना गया है, जिसके बिना मानव धर्म का सांसारिक स्वरूप अधूरा है । इन्हीं देवी शक्तियों में दुर्गा के नौ रूप हैं तथा अनेक देवी शक्तियाँ यथा संतोषी माता, करणी माता, वैष्णवी माता, मुम्बा देवी आदि सम्पूर्ण भारत में पूजी जाती हैं । जिनकी पूजा - अर्चना में बलि चढ़ाने व मद्यपान की प्रथा प्रचलित है । श्री लालदास जी महाराज श्री राम का स्मरण करते थे तथा उन्हीं के जीवन चरित्र को अपना आदर्श माना है । विष्णु भगवान स्वयं लालदास जी के गुरु थे अतः लालजी ने अपने गुरु की शिक्षा के अनुसार अपने आराध्य श्रीराम की जीवन शैली को अपना कर जीव हत्या ( बलि प्रथा ), मद्यपान, तम्बाकू सेवन अथवा अन्य प्रकार की वस्तु का सेवन से सर्वथा दूर रहे क्योंकि ये सभी आसुरी वृत्ति को बढ़ावा देने वाली हैं । भक्त की जिज्ञासा लालदासी सम्प्रदाय में देवी पूजा निषेध क्यों है...
श्री राम कहते हैं मांगना नहीं कामना सीखो. फिर चाहे इज्जत हो या दौलत सोच का ही तो फर्क होता है. वरना समस्याएं आपको कमजोर करने के लिए नहीं बल्कि मजबूत बनाने के लिए आई है. जी दिन आप अपनी हंसी के मलिक खुद बन जाओगे तब आपको कोई भी नहीं रुदा सकता. समझदार इंसान का दिमाग चला है और ना समझ इंसान की. जुबान गरीब रहोगे तो कोई ध्यान नहीं देगा. मेहनत करोगे.