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‘पत्नी चालीसा.’

 ‘पत्नी चालीसा.’


नमो-नमो पत्नी महारानी,
तुम्हरी महिमा कोई न जानि,
हमने समझा तुम अबला हो,
पर तुमतो सबसे बड़ी बला हो,
जिस दिन हाथ में बेलन आवे,
उस दिन पति खूब चिल्लावे,
सारे बैड पे पत्नी सोवे,
पति बैठ फर्श पर रोवे,
तुमसे ही घर मथुरा काशी,
और तुमसे ही घर सत्यानासी,
पत्नी चालीसा जो नर गावे,
सब सुख छोड़ परम दुःख पावे.

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