सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

तरबूज के लाभ सभी तक पहुंचायें

तरबूज के लाभ सभी तक पहुंचायें
आप स्वस्थ हों देश स्वस्थ हो और साथ ही अपना व देश का करोड़ों रुपये बचायें
तरबूज – Water Melon: कई बिमारियों की काट है 
तरबूज का परिचय (Introduction of Tarbuj)

आप तरबूज (tarbooz in Hindi) जरूर खाते होंगे। जब भी बाजार में तरबूज बिक्री के लिए आता है तो तरबूज के दुकानों पर रोजाना ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। असल में, तरबूज का स्वाद ही इतना मीठा और अच्छा होता है कि सभी लोगों को बहुत पसंद आता है। आप जब भी तरबूज खरीदते हैं तो इसके अंदर का गूदा खा लेते हैं और छिलके या बीजों को फेंक देते हैं। है ना! क्या आपको पता है कि तरबूज का गूदा जितन शरीर के लिए फायदेमंद (tarbooz ke fayde in Hindi) होता है उतना इसकी बीज भी होती है? क्या आप जानते हैं कि तरबूज का सेवन कर कई विकारों में लाभ पाया जा सकता है या तरबजू के इस्तेमाल द्वारा अनेक रोगों की रोकथाम भी की जा सकती है?

What is Tarbuj

Tarbuh Called in Different Languages

Tarbuj Benefits and Uses

Watermelon Benefits to Stop Vomiting
Tarbuj Fruit Benefits for Relieves Thirst Problem
Benefits of Watermelon in Body Weakness
Watermelon Benefits in Fighting Itching
Tarbuj Fruit Benefits in Treating Fever
Benefits of Watermelon in Relieving from Throat Disorder
Watermelon Benefits in Relieves a Headache
Benefits of Watermelon in Treating Eye Disease
Tarbuj Fruit Benefits in Fighting Mouth Ulcers
Kalingad Uses in Cures Cough
Tarbuj is Beneficial in Intestinal Disease
Tarbuj Benefits to Stop Diarrhea
Kalingad Uses in Relieves from Acidity
Benefits of Tarbuj in Jaundice Treatment
Tarbuj Fruit Uses in Diagnosis Gonorrhea
Use of Kalingad to Treats Urination of Urine
Tarbuj Fruit Benefits to Treats Urinary Problems
Tarbuj Benefits in Cure Pittaj Disease
Tarbuj Fruit Uses in Treatment of Arthritis
How Much to Consume Tarbuj

How to Use Tarbuj

Where is Tarbuj Found or Grown

दरअसल आयुर्वेद में तरबूज को एक बहुत ही गुणकारी फल के रूप में बताया गया है। पतंजलि के अनुसार, तरबूज के सेवन से रोगों को ठीक करने में बहुत मदद मिलता है। आप भी इन सारी खूबियों के बारे में जान लीजिए और तरबूज का भरपूर लाभ लीजिए।

तरबूज क्या है (What is Tarbuj)

तरबूज (tarbooz in Hindi) एक फल है। यह खरबूजे (karbooja) के जैसी होती है लेकिन इसकी लता खरबूजे से अधिक लम्बी तथा दूर तक फैलने वाली लता होती है। तरबूज के पौधे का तना स्थूल कोणीय, खांचयुक्त होता है। इसके पत्ते सीधे, पंचखण्डयुक्त और किनारों पर कटे हुए और लम्बे तथा गहरे होते हैं।

इसके फूृल पीले रंग के होते हैं। इसके फल गोलाकार अथवा अण्डाकार होते हैं। फलों में चिकनापन तो होता ही है साथ ही हरे रंग के बहुत से चमकीले आवरण भी होते हैं।

फल के अन्दर का गूदा लाल या पीला-सफेद रंग का होता है। फल का छिलका हरे रंग का और धब्बेदार तथा कई धारियों से युक्त होता है। तरबूज की बीज चपटे, नुकीले, काले अथवा सफेद रंग के तथा चिकने होते हैं। तरबूज के पौधे में फूल और फल लगने का समय अप्रैल से अगस्त तक होता है।

तरबूज (tarbooz in Hindi) के इस्तेमाल से कफज विकार के कारण होने वाली बीमारी, दस्त, शुक्राणु रोग, वीर्य रोग, मूत्र रोग, मल रोग, आंखों की बीमारी, खून की कमी आदि में लाभ (tarbooz ke fayde in Hindi) लिया जा सकता है।

अनेक भाषाओं में तरबूज के नाम (Tarbuh Called in Different Languages)

भारत में तरबूज (tarbooj) को मुख्यतः तरबूज के नाम से ही जानते हैं लेकिन इसके और भी नाम है जिनसे देश या विदेशों में तरबूज का जाना जाता है। तरबूज का वानस्पतिक नाम सिट्रुलस लेनेटस (Citrullus lanatus (Thunb.) Mats. & Nakai, Syn-Citrullus vulgaris Schrad., कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) है और इसके अन्य नाम ये हैंः-

Tarbuj in-

Hindi (tarbuj in Hindi) – तरबूज, तरबूजा, हिनमाना
English- वाटर मेलन (Water melon), व्हाइट वाटर मेलन (White water melon)
Sanskrit – कालिन्द, तरंबूजा, कालिङ्ग, सुवर्त्तुल
Urdu – तरबूज (Turbuj)
Gujarati – तड़बूज (Tadbuj), तरबुच (Tarbuch)
Tamil – कोंमाट्टि (Komantti), पुल्लुम (Pullum)
Telugu – पुञ्चकाया (Punchkaya), तरबूं (Tarbujam)
Bengali – तरमुज (Tarmuj), तरबुज (Tarbuza), कालिन्गढ़ (Kalingarh)
Nepali – तर्बुजा (Tarbuja)
Punjabi – हिंडवाना (Hindwana), माथिरा (Mathira)
Marathi (tarbuj in marathi) – कलिगड (Kalingada), करिंग (Karing)
Arabic- बतिख हिन्दी (Batikh Hindi), जकी (Zki), बातिघेहिन्दी (BatigheHindi); Persian – हिन्दबाना (Hindbana), दिलपसन्द (Dilpasand) हिन्दानह (Hindanah)
तरबूज के फायदे (Tarbuj Benefits and Uses)

अब तक आपने जाना कि जिस तरबूज को आप केवल एक साधारण सा फल के रूप में जानते हैं उसके कितने नाम है और वह कितना फायदेमंद होता है। आइए अब जानते हैं कि तरबूज के इस्तेमाल से कितनी सारी बीमारियों में लाभ (tarbooz ke fayde in Hindi) लिया जा सकता है। तरबूज के औषधीय प्रयोग, औषधीय प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

उल्टी को रोकने के लिए करें तरबूज का प्रयोग (Watermelon Benefits to Stop Vomiting in Hindi)

उल्टी को रोकने के लिए तरबूज का इस्तेमाल फायदा पहुंचाता है। आप 5-10 मिली तरबूज के फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे उल्टी में लाभ होता है।

अधिक प्यास लगने की परेशानी तरबूज के सेवन से फायदा (Tarbuj Fruit Benefits for Relieves Thirst Problem in Hindi)

अनेक लोग अधिक प्यास लगने की समस्या से ग्रस्त रहते हैं। अधिक प्यास लगने की परेशानी में तरबूज के फल का रस पिएं। इसे 20-50 मिली की मात्रा में पीने से अत्यधिक प्यास लगने की समस्या ठीक होती है।

शारीरिक कमजोरी को दूर करता है तरबूज का सेवन (Benefits of Watermelon in Body Weakness in Hindi)

शारीरिक कमजोरी की परेशानी में भी तरबूज का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है। 5-10 ग्राम तरबूज (tarbooj) की बीज का चूर्ण बनाएं। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर में शक्ति आती है।

खुजली में फायदेमंद तरबूज का इस्तेमाल (Watermelon Benefits in Fighting Itching in Hindi)

जिस किसी व्यक्त को खुजली की परेशानी है वे तरबूज फल को पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं। इससे खुजली ठीक हो जाती है।

तरबूज से बुखार का इलाज (Tarbuj Fruit Benefits in Treating Fever in Hindi)

तरबूज (tarbooj) फल के छिलके को पीसकर लेप करने से बुखार और बुखार के कारण होने वाली शरीर में जलन से आराम मिलता है।

इसी तरह 10-40 मिली फल के रस में चीनी एवं मधु मिलाकर पीने से बुखार में लाभ होता है।

तरबूज के सेवन से कंठ रोग का उपचार (Benefits of Watermelon in Relieving from Throat Disorder in Hindi)

तरबूज फल के रस का गरारा करने से कण्ठ रोग में लाभ होता है।

तरबूज के इस्तेमाल से मिलती है सिर के दर्द से राहत (Watermelon Benefits in Relieves a Headache in Hindi)

सिर दर्द की परेशानी में तरबूज का इस्तेमाल उपयोगी साबित होता है। 30-40 मिली तरबूज (tarbooz) फल के रस में मिश्री मिलाकर पिएं। इससे सिर की दर्द से आराम मिलता है।

आंखों की जलन में में लाभदायक तरबूज का उपयोग (Benefits of Watermelon in Treating Eye Disease in Hindi)

आंखों में जलन की समस्या से परेशान लोग तरबूज का उपयोग कर सकते हैं। तरबूज के फलों को पीसकर आंखों के चारों तरफ (बाहर की ओर) लगाने से आंखों की जलन मिटती है।

तरबूज के सेवन से मुंह के छाले का इलाज (Tarbuj Fruit Benefits in Fighting Mouth Ulcers in Hindi)

आप मुंह के छाले का इलाज तरबूज से कर सकते हैं। तरबूज (tarbooz) फल के रस से गरारा करने से मुंह के घाव से मुंह के छाले आदि में भी लाभ मिलता है।

खांसी के इलाज के लिए करें तरबूज का प्रयोग (Kalingad Uses in Cures Cough in Hindi)

खांसी की बीमाीर को ठीक करने के लिए 30-40 मिली तरबूज फल के रस में 1 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा शहद मिलाएं। इसे पीने से खांसी में लाभ होता है।

आंतों की बीमारी (आंतों की सूजन) में उपयोगी होता है तरबूज का इस्तेमाल (Tarbuj is Beneficial in Intestinal Disease in Hindi)

आंतों के रोग का इलाज करने करने के लिए तरबूज की बीज तथा पत्तों को पीस लें। इसे पेट पर बांधने से आंतों के रोग जैसे आंतों की सूजन मिटती है।

तरबूज का इस्तेमाल दस्त को रोकने में फायदेमंद (Tarbuj Benefits to Stop Diarrhea in Hindi)

दस्त को रोकने के लिए 5-10 मिली फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से दस्त (अतिसार तथा आमातिसार) में लाभ होता है।

तरबूज के उपयोग से एसिडिटी की समस्या का इलाज (Kalingad Uses in Relieves from Acidity in Hindi)

आजकल बहुत सारे लोग एसिडिटी की परेशानी से पीड़ित रहते हैं। इसमें तरबूज के सेवन से लाभ मिलता है। तरबूज (tarbooz) के फल का रस 20-50 मिली की मात्रा में पीने से एसिडिटी की समस्या ठीक होती है।

तरबूज के सेवन से पीलिया का उपचार (Benefits of Tarbuj in Jaundice Treatment in Hindi)

तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ तथा स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करें। इसे पीलिया में लाभ होता है।

इसी तरह 10-30 मिली फल के रस को पीने से भी पीलिया में फायदा (tarbooz ke fayde in Hindi) होता है।

सुजाक में उपयोगी तरबूज का इस्तेमाल (Tarbuj Fruit Uses in Diagnosis Gonorrhea in Hindi)

फल के रस में समान मात्रा में छाछ तथा स्वाद के अनुसार नकम (लवण) मिलाकर सेवन करने से सुजाक की बीमारी में लाभ होता है।

पेशाब की जलन को ठीक करता है तरबूज (Use of Kalingad to Treat Urination of Urine in Hindi)

तरबूज की बीज का चूर्ण बनाएं और इसे 2-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेशाब की जलन की बीमारी ठीक होती है और पेशाब न आने की परेशानी भी ठीक होती है।

मूत्र विकार या मूत्र रोग में लाभदायक तरबूज का इस्तेमाल (Tarbuj Fruit Benefits to Treats Urinary Problems in Hindi)

तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ तथा स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करने से मूत्राशय के विकारों में लाभ होता है।

आप 10-20 मिली तरबूज फल के रस का सेवन करेंगे तो पेशाब में दर्द की समस्या, रुक-रुक कर पेशाब आने की परेशानी सहित मूत्र के अन्य रोग में भी लाभ होता है।

तरबूज की बीजों का चूर्ण बनाएं और उसके 1-2 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से मूत्र विकारों में बहुत लाभ होता है।

तरबूज के इस्तेमाल से पित्तज विकारों का उपचार (Tarbuj Benefits in Cure Pittaj Disease in Hindi)

तरबूज (tarbuj) फल के रस को 20-50 मिली में पीने से पित्तज विकार ठीक होते हैं।

तरबूज का करें उपयोग होगा गठिया में लाभ (Tarbuj Fruit Uses in Treatment of Arthritis in Hindi)

गठिया एक गंभीर बीमारी है। इसमें जोड़ों में बहुत दर्द होता है। यह बीमारी शरीर के किसी भी जोड़ में हो सकती है। इसमें भी तरबूज के इस्तेमाल से लाभ होता है। तरबूज फल को पीसकर जोड़ों में लगाएं। गठिया में लाभ होता है।

तरबूज के इस्तेमाल की मात्रा (How Much to Consume Tarbuj)

एक औषधि के रूप में तरबूज के इस्तेमाल की मात्रा ये होनी चाहिएः-

तरबूज (tarbuj) का रस – 10-40 मिली

तरबूज का चूर्ण – 5-10 ग्राम

अधिक लाभ के लिए तरबूज का औषधि के रूप में प्रयोग किसी चिकित्सक के परामर्शानुसार ही करें।

तरबूज के इस्तेमाल का तरीका (How to Use Tarbuj)

तरबूज का प्रयोग इस तरह से किया जाना चाहिएः-

तरबूज का फल

तरबूज के बीज

तरबूज के पत्ते

तरबूज कहां पाई जाती है या तरबूज की खेती कहां होती है (Where is Tarbuj Found or Grown)

तरबूज (tarbuj) की खेती भारत में नदियों के किनारे मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं आसाम में की जाती है। यह उष्णकटिबंधीय देशों एवं दक्षिण अफ्रिका में भी पाया जाता है।

🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*  *औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।* *महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।* *सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।* *बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।* *जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।* *चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५*  मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।  इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।  शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है। १ प्रथम शैलपुत्री यानि ...

बुज़ुर्गों का सम्मान करें यह हमारी धरोहर है ...

पिता जिद कर रहे थे कि उसकी चारपाई गैलरी में डाल दी जाये। बेटा परेशान था। बहू बड़बड़ा रही थी..... कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता। हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं गैलरी से सबका निकलना आना जाना है पता नही वहां क्यो पड़े रहना चाहते हैं? पिता कमजोर और बीमार हैं चारपाई से उठ भी नही पाते.... जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ। अमित ने सोचा। पिता की इच्छा  पू्री करना उसका स्वभाव था। अब पिता की चारपाई गैलरी में आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते । कुछ देर लान में टहलते । लान में खेलते नाती - पोतों से बातें करते , हंसते , बोलते और मुस्कुराते । कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें लाने की फरमाईश भी करते । खुद खाते , बहू - बटे और बच्चों को भी खिलाते .... धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था। दादा !  मेरी बाल फेंको... गेट में प्रवेश करते हुए अमित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी, तो अमित अपने बेटे को डांटने लगा... अंशुल बाबा बुजुर...

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द एक अध्ययन के मुताबिक 1999-2010 के बीच मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ी बीमारियों में 45 फीसदी का इजाफा हुआ है। शोध बताते हैं कि भविष्य में मानसिक रोगों के बाद मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द की बीमारी दूसरी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या होगी।  समय पर सही जांच व उपचार के बारे में बता रही हैं एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ रूमैटॉलजी में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमा कुमार देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां मधुमेह, रक्तचाप, दिल के रोग आदि बढ़ रहे हैं, लेकिन एक और बीमारी है, जो तेजी से अपने पैर पसार रही है। खेद की बात यह है कि इसकी ओर नीति-निर्माताओं का ध्यान भी कम है। यह रोग है मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ा गठिया या आर्थ्राइटिस। इसमें मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, सूजन, लालिमा पैदा होती है। इसके रोगी को उठने-बैठने, चलने-फिरने, झुकने या किसी खास किस्म का कार्य करने में तकलीफ होती है। इसे रूमैटिज्म या गठिया कहते हैं। गठिया की बीमारी करीब दो सौ किस्म की होती है। कई बार कई किस्म के बुखार या कभी-कभी मांसपेशियों के दबने या उन पर दबाव पड़ने की वजह ...