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संदेश

 🗝 चाँदी की चाबी वह एक तूफ़ानी रात थी. एक यात्री एक सराय में पहुंचा। चूँकि बहुत देर हो चुकी थी, उसने पाया कि दरवाज़ा भीतर से बंद है। उसने दरवाज़ा खटखटाया. द्वारपाल ने दस्तक का जवाब देते हुए कहा, "मैंने चाबी खो दी है और जब तक आपके पास चांदी की चाबी नहीं होगी तब तक दरवाजा नहीं खोला जा सकता।" यात्री समझ गया कि चाँदी की चाबी से उसका क्या मतलब है। उसने तुरंत छेद में एक चाँदी का सिक्का डाला और दरवाज़ा खुल गया। अन्दर पहुँचते ही उसने द्वारपाल से कहा, “मैं अपना बक्सा बाहर भूल गया हूँ, कृपया उसे ले आओ।” जैसे ही द्वारपाल बक्सा लाने के लिए बाहर गया, यात्री ने उसके पीछे का दरवाज़ा बंद कर दिया। रखवाले ने उससे दरवाजा खोलने के लिए कहा ताकि वह अंदर आ सके। अब यात्री ने अंदर से उत्तर दिया, "मेरी चाबी खो गई है और दरवाजा खोलने के लिए चांदी की चाबी की जरूरत है।" जल्द ही सिक्के को फिर से छेद में धकेल दिया गया और बेईमान आदमी को अंदर जाने दिया गया। शिक्षा: बेईमानी से बेईमानी मिलती है।
  फ़सी भँवर में थी मेरी नैया चलाई तूने तो चल पड़ी है, पड़ी जो सोइ थी मेरी किस्मत वो मौज करने निकल पड़ी है, फ़सी भँवर में थी मेरी नैया भरोसा था मुझको मेरे बाबा यकीन था तेरी रेहमतो पे, था बैठा चौकठ पे तेरी कब से निगाहें निर्धन पे अब पड़ी है, फ़सी भँवर में थी मेरी नैया... सजाऊ तुझको निहारु तुझको पखारू चरणों को श्याम तेरे, मैं नाचू बन कर के मोर बाबा ये भावनाये मचल पड़ी है, फ़सी भँवर में थी मेरी नैया.... हसे या कुछ भी कहे ज़माना जो रूठे तो कोई गम नहीं है, मगर जो रूठा तो लेहरी मुझसे भहे गई अश्को से ये झड़ी है, फ़सी भँवर में थी मेरी नैया
 एक बार विष्णु भगवान बैकुंठ लोक में शेष शय्या पर आंखें मूंदे लेटे मन ही मन मुस्कुरा रहे थे. देवी लक्ष्मी उनकी चरण सेवा कर रही थीं. भगवान को मन में ही मुस्काता देख देवी को कौतूहल हुआ.देवी लक्ष्मी ने उनसे प्रश्न किया- भगवन आप संपूर्ण जगत का पालन करते हुए भी अपने ऐश्वर्य के प्रति उदासीन से होकर इस क्षीर सागर में नींद ले रहे हैं, इसका क्या कारण है? श्रीहरि पुनः मुस्कुराए और अपनी मोहक मुस्कान बिखेरते हुए बोले- हे प्रिये मैं नींद नहीं ले रहा बल्कि अपनी अंतर्दृष्टि से अपने उस तेज का साक्षात्कार कर रहा हूं देवी जिसका योगी अपनी दृष्टि से दर्शन कर लेते हैं. जिस शक्ति के अधीन यह समस्त संसार है मैं जब भी उसका मन में दर्शन करता हूं तब आपको ऐसा प्रतीत होता है कि मैं नींद में डूबा हूं परंतु ऐसा है नहीं. भगवान ने इतनी रहस्यमय तरीके से बात कही कि लक्ष्मीजी को कुछ बातें समझ में आईं कुछ नहीं आईं. उन्होंने पुनः प्रश्न किया- हे नाथ आपके अतिरिक्त भी कोई शक्ति है जिसका ध्यान स्वयं आप करते हों. यह बात तो मुझे घोर विस्मय में डालती है श्रीहरि ने कहा- देवी इस बात को अच्छी प्रकार से समझने के लिए आपको गीता के ...

💁🏻‍♂️ *थायराइड क्‍या है*

👉 *थायराइड शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड है जो तितली के आकार का होता है एवं गले में स्थित है। इसमें से थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म की दर को संतुलित करता है। थायराइड ग्लैंड्स शरीर से आयोडीन लेकर इन्हें बनाते हैं। यह हार्मोन मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जरूरी होती हैं। थायराइड हार्मोन का स्राव जब असंतुलित हो जाता है तो शरीर की समस्त भीतरी कार्यप्रणालियां अव्यवस्थित हो जाती हैं। थायराइड दो प्रकार का होता है, पहला हाइपोथायराइड एवं दूसरा हायपरथायराइड।*   हाइपोथायराइड  इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता जिससे शरीर में आवश्यकतानुसार टी.थ्री व टी. फोर हार्मोन नहीं पहुंच पाता है। इस स्थिति में वजन में अचानक वृद्धि हो जाती है। सुस्ती महसूस होती है। रोजाना की गतिविधियों में रूचि कम हो जाती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। पैरों में सूजन व ऐंठन की शिकायत होती है। चलने में दिक्कत होती है। ठंड बहुत महसूस होती है। कब्ज होने लगती है। चेहरा व आंखें सूज जाती हैं। मासिक चक्र अनियमित हो जाता है। त्वचा सूखी व बाल बेजान होकर झड़ने लगते ...

मीठा : सेहत के लिए नही अच्छा

*_मीठा : सेहत के लिए नही अच्छा : एक महीने के लिए मीठा छोड़कर देखिए, आप खुद महसूस करने लगेंगे ये 14 बदलाव_*   मीठा बोलना तक तो ठीक है पर मीठा खाना सेहत कै लिए उतना ही नुकसानदायक है जानिये मीठे से होने वाले प्रभावों को ... *1 चीनी का सेवन* चीनी का सेवन आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है। मीठा खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है, यह जानते हुए भी कि आजकल के दौर में हम शारीरिक तौर पर ज्यादा मेहनत नहीं करते, फिर भी मीठा तो बहुत से लोगों की वीकनेस है। *2 मीठा* वैसे इस श्रेणी में मैं भी शामिल हूं। खाने के बाद मीठा तो जरूर चाहिए, मौसम अच्छा हो तो मीठा चाहिए, गर्मी ज्यादा हो तो मिल्कशेक चाहिए, ठंड हो तो जलेबी या गर्मागर्म हलवा चाहिए। बाकी बिना किसी अवसर के भी कभी-कभी मीठा खाया जाए तो कोई क्या प्रॉब्लम है। *3 बिना मीठे के भोजन* लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है अगर खाने से मीठे की मात्रा हटा ली जाए, आपके भोजन से चीनी को पूरी तरह गायब कर दिया जाए तो शरीर पर किस तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं? नहीं सोचा तो चलिए हम ही आपको बता देते हैं कि अगर आप आने वाले एक महीने तक चीन...

रात को दही में सोने का सिक्का डालकर, सुबह के समय इस दही को खाने से शरीर में क्या होता है?

रात को दही में सोने का सिक्का डालकर, सुबह के समय इस दही को खाने से शरीर में क्या होता है? रात को एक कटोरी दूध लें और उसमें एक सोने का सिक्का डालकर अलग से दही को जमा दे। सुबह के समय सोने के सिक्के को निकाल लें और इस दही का खाली पेट सेवन करें क्योंकि खाली पेट सेवन करना ज्यादा लाभकारी माना गया है। एक घंटे तक कुछ न खाए। इस दही का रोजाना सेवन करने से जो शरीर को फायदे मिलते हैं वह इस प्रकार हैं:- 1. इस दही के सेवन से शरीर की थकावट दूर होती है। बुढ़ापे को दूर करने और जवानी को बरकरार रखने में सहायक है। 2. मधुमेह जैसे रोग से लड़ने में काफी कारगर साबित होता है। मधुमेह के कारण पुरषों में आईं शारीरिक शक्ति में हुई कमी को भी दूर करता है। 3. इस दही के रोजाना सेवन से पेट की सभी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। पेट की गर्मी शांत होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है। 3. इस दही के सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है। 5. इसके रोजाना सेवन से त्वचा का रूखापन दूर होता है। त्वचा में चमक और निखार आता है। 6. हृदय संबंधी रोग दूर होते हैं और हृदय की मांसपेशियां भी शक्तिशाली बनती है। 7. अ...

*🌹हाथों से भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद*

*🌹हाथों से भोजन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद*  🌹आजकल पाश्चात्य रहन-सहन से प्रभावित होकर हाथों से भोजन करने के बजाय चम्मच और काँटों के उपयोग का प्रचलन बढ़ रहा है । हाथों से भोजन करने के लाभों से हम परिचित नहीं हैं । 🌹हमारा शरीर पाँच तत्वों से बना है । मुद्रा विज्ञान के अनुसार हमारे हाथों से ऊर्जा का तीव्र बहाव होता रहता है । अँगूठा अग्नि, तर्जनी उँगली वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका पृथ्वी व कनिष्ठिका जल-तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं । इन पाँचों तत्वों का असंतुलित होना विभिन्न बीमारियों की जड़ है। 🌹 हाथ से भोजन करते समय हम उँगलियों और अँगूठे को मिलाकर भोजन करते हैं, जिससे पाँचों तत्व एकजुट हो जाते हैं और भोजन ज्यादा ऊर्जादायक व स्वास्थ्यप्रद बन जाता है । इससे हमारे प्राणाधार की ऊर्जा भी संतुलित रहती है । 🔹 भोजन करने के लिए जब हम भोजन को स्पर्श करते हैं तो हमारा मस्तिष्क पेट को यह संकेत देता है कि हम भोजन करने वाले हैं । इससे हमारा पेट भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है और पाचन-क्रिया सुधरती है । 🔹हाथ एक अच्छे तापमान-संवेदक का काम भी करता है । भोजन यदि ज्यादा गर्म होता है तो उसे म...