सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

रात को दही में सोने का सिक्का डालकर, सुबह के समय इस दही को खाने से शरीर में क्या होता है?

रात को दही में सोने का सिक्का डालकर, सुबह के समय इस दही को खाने से शरीर में क्या होता है?
रात को एक कटोरी दूध लें और उसमें एक सोने का सिक्का डालकर अलग से दही को जमा दे।


सुबह के समय सोने के सिक्के को निकाल लें और इस दही का खाली पेट सेवन करें क्योंकि खाली पेट सेवन करना ज्यादा लाभकारी माना गया है। एक घंटे तक कुछ न खाए।


इस दही का रोजाना सेवन करने से जो शरीर को फायदे मिलते हैं वह इस प्रकार हैं:-

1. इस दही के सेवन से शरीर की थकावट दूर होती है। बुढ़ापे को दूर करने और जवानी को बरकरार रखने में सहायक है।

2. मधुमेह जैसे रोग से लड़ने में काफी कारगर साबित होता है। मधुमेह के कारण पुरषों में आईं शारीरिक शक्ति में हुई कमी को भी दूर करता है।

3. इस दही के रोजाना सेवन से पेट की सभी बीमारियों से छुटकारा मिलता है। पेट की गर्मी शांत होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है।

3. इस दही के सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है।

5. इसके रोजाना सेवन से त्वचा का रूखापन दूर होता है। त्वचा में चमक और निखार आता है।

6. हृदय संबंधी रोग दूर होते हैं और हृदय की मांसपेशियां भी शक्तिशाली बनती है।

7. अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य में लाभकारी है।

8. रक्त की कमी दूर होती है और रक्त शुद्ध होता है।

9. इस दही के रोजाना सेवन से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और शरीर निरोग हो जाता है।

10. एकाग्रता और स्मृति में बढ़ोतरी होती है।

11. इस दही के रोजाना सेवन से आंखों से संबंधित होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिलता है।

12. ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रहता है और तनाव से मुक्ति मिलती है।

13. इसके रोजाना सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और कैंसर की संभावना भी नहीं रहती।

14. इस दही के रोजाना सेवन से सिर दर्द, खांसी और सर्दी से राहत मिलती है।

🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*  *औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।* *महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।* *सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।* *बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।* *जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।* *चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५*  मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।  इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।  शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है। १ प्रथम शैलपुत्री यानि ...

बुज़ुर्गों का सम्मान करें यह हमारी धरोहर है ...

पिता जिद कर रहे थे कि उसकी चारपाई गैलरी में डाल दी जाये। बेटा परेशान था। बहू बड़बड़ा रही थी..... कोई बुजुर्गों को अलग कमरा नही देता। हमने दूसरी मंजिल पर कमरा दिया.... सब सुविधाएं हैं, नौकरानी भी दे रखी है। पता नहीं, सत्तर की उम्र में सठिया गए हैं गैलरी से सबका निकलना आना जाना है पता नही वहां क्यो पड़े रहना चाहते हैं? पिता कमजोर और बीमार हैं चारपाई से उठ भी नही पाते.... जिद कर रहे हैं, तो उनकी चारपाई गैलरी में डलवा ही देता हूँ। अमित ने सोचा। पिता की इच्छा  पू्री करना उसका स्वभाव था। अब पिता की चारपाई गैलरी में आ गई थी। हर समय चारपाई पर पडे रहने वाले पिता अब टहलते टहलते गेट तक पहुंच जाते । कुछ देर लान में टहलते । लान में खेलते नाती - पोतों से बातें करते , हंसते , बोलते और मुस्कुराते । कभी-कभी बेटे से मनपसंद खाने की चीजें लाने की फरमाईश भी करते । खुद खाते , बहू - बटे और बच्चों को भी खिलाते .... धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य अच्छा होने लगा था। दादा !  मेरी बाल फेंको... गेट में प्रवेश करते हुए अमित ने अपने पाँच वर्षीय बेटे की आवाज सुनी, तो अमित अपने बेटे को डांटने लगा... अंशुल बाबा बुजुर...

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द

जोड़ों और मांसपेशियों का बढ़ता दर्द एक अध्ययन के मुताबिक 1999-2010 के बीच मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ी बीमारियों में 45 फीसदी का इजाफा हुआ है। शोध बताते हैं कि भविष्य में मानसिक रोगों के बाद मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द की बीमारी दूसरी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या होगी।  समय पर सही जांच व उपचार के बारे में बता रही हैं एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ रूमैटॉलजी में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमा कुमार देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां मधुमेह, रक्तचाप, दिल के रोग आदि बढ़ रहे हैं, लेकिन एक और बीमारी है, जो तेजी से अपने पैर पसार रही है। खेद की बात यह है कि इसकी ओर नीति-निर्माताओं का ध्यान भी कम है। यह रोग है मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द से जुड़ा गठिया या आर्थ्राइटिस। इसमें मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, सूजन, लालिमा पैदा होती है। इसके रोगी को उठने-बैठने, चलने-फिरने, झुकने या किसी खास किस्म का कार्य करने में तकलीफ होती है। इसे रूमैटिज्म या गठिया कहते हैं। गठिया की बीमारी करीब दो सौ किस्म की होती है। कई बार कई किस्म के बुखार या कभी-कभी मांसपेशियों के दबने या उन पर दबाव पड़ने की वजह ...